भारतीय बहुसंख्यक समुदाय में अल्पसंख्यकों के लिए सबसे बड़ी गलतफहमी ये है की हर आतंकी मुस्लिम कयों होता हैं। जबकि उनकी ये धारणा बिलकुल सत्य नहीं है। अगर आप भारत की बात करें तो भारत में "ग़ैरक़ानूनी गतिविधि प्रतिबंध एक्ट" के तहत प्रतिबंधित आतंकी संगठनों में से एक तिहाई भी मुस्लिम आतंकी संगठन नहीं है। और यह भी हकीकत नहीं है कि भारत में अधिकतर हिंसा मुस्लिम संगठनों द्वारा होती है। 2005 से 2014 के बीच (साउथ एशिया पोर्टल के मुताबिक) अधिकतर लोग पूर्वोत्तर के उग्रवादियों और वाम अतिवादियों की हिंसा में मारे गए । ये सभी ग़ैर मुस्लिम संगठन हैं और इस दौरान हिंसा में सबसे बड़ा पूर्वोत्तर का उग्रवादी संगठन उल्फा, बहुसंख्यकों के उच्च जातियों द्वारा संचालित है।
दुसरी तरफ साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर से लेकर असिमानंद तक कई आतंकी जेलों में बंद हैं जोकी मुस्लिम नहीं हैं। एक बम धमाके में 20 लोगों की हत्या आतंकवाद है, बिलकुल सही लेकिन 1984 में दिल्ली, 2002 में गुजरात में हज़ारों लोगों की हत्या अथवा मुज़फ्फरनगर में 40 और ओडिशा में 2008 में 68 लोगों की हत्या को आतंकवाद की श्रेणी क्यो नहीं रख सकते है। जबकी हर दंगे की तैयारी योजनाबद्ध तरीके से होती है, जिसमें हथियारों के संग्रहण से सुनियोजित हमले तक होते हैं। तो फिर इनको आतंकवाद क्यों नहीं माना जाता है ? बेगुनाहों और मासुमों का कत्ल आतंकवाद है चाहे वो किसी बम धमाके द्वारा किये जाएँ या किसी योजनाबद्ध तरीके से दंगा-फसाद कर के। ये धारणा छोड़ दिजिये की आतंकवाद का कोई धर्म होता है।
और अगर आप अंतरराष्ट्रीय आतंक की बात करते हैं तो, एक रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक बमबारी मुस्लिम देशों में हुई है, जिससे लाखों की तादाद में मुस्लिम मारे गए, मुस्लिम राष्ट्रों पर बमबारी करने मे ज्यादा तर जो भी राष्ट्र आगे रहते है वे पुंजीपतियों , सरमायेदारों और साम्राज्यवादी होते है, जो की ईसाई पारसी यहुदी राष्ट्र के होते है। लेकिन बम बर्षा और दंगाईयों की हुडदंग और व्यापक जनसंहार के बावजुद इन पर ईल्जाम कतई नही लगता है, दुनियाँ के सभी मानवतावादी संगठन भी इनपर चुप्पी साधी रहती है। कुछ मुसलिम नामों को प्रस्तुत कर पुरे इसलाम को आतंकवाद से जोड़ना गलत है, जबकि कोई सच्चा मुसलमान किसी भी प्रकार से आतंकवाद का समर्थन कतई नहीं कर सकता।
और अगर आप किसी देश पर आतंकी हमले की बात करते हैं तो अमेरिका को ले लिजिये, ऍफ़.बी.आई के अनुसार वर्ष 1980 से 2005 तक 318 आतंकी हमले हो चुके थे। जिसमे 209 बम से हुए थे। 42 फीसद लटिनो ग्रुप ने, 24 फीसद कट्टरपंथी लेफ्ट वविंग,7 फीसद कट्टर पंथी यहूदी, 6 फीसद मुस्लिम कट्टरपंथी और 5 फीसद कम्युनिस्ट और बाकी अन्य ने किये
11 सितम्बर 2001 के बाद से एक भी अमेरिकी किसी भी मुस्लिम आतंकी द्वारा नहीं मरा। 9/11 से 2009 तक अमेरिका में 83 आतंकी हमले हुए जिसमे केवल 3 मुस्लिम आतंकियो ने किये। अमेरिका में 1970 के दशक में 2010 के दशक से ज़्यादा आतंकी गतिविधिया दर्ज की गयी जिसे करने वाले मुस्लिम नहीं थे। तब हर साल 60 आतंकी हमले हर साल होते जो 9/11 से 15 गुना ज्यादा है
और अमेरिका में प्रमुख आतंकी संगठन के नाम भी जान लिजिये ।
▪एनिमल लिबरेशन फ्रंट : जानवरों के हितों के लिए हिंसक गतिविधियाँ अपनाते है। 1982 में यूनाइटेड किंगडम की सभी चार बड़ी राजनैतिक पार्टियों समेत प्रधानमंत्री मार्ग्रेट थेचर के पास लेटर बम भेजे थे। 1983 में फर बेचने वाले स्टोर्स में सिलसिलेवार धमाके किये। सितम्बर 1985 में शरत गांगुली और स्टुअर्ट वॉकर जो ब्रिटिश इंडस्ट्रियल बायोलॉजिकल रीसर्च एसोसिएशन के शोधकर्ता थे , की गाड़ियों में बम लगा चुके है, सौभाग्य से दोनों बच गए थे
▪अल्फा66 और ओमेगा 7 : क्यूबा का संगठन है कई बम धमाके कर चुका है (
▪आर्मी ऑफ़ गोड : 1997 में एटलांटा के एंटी एबॉर्शन और एंटी समलैंगिक , दो एबॉर्शन क्लिनिक और लेस्बियन नाईट क्लब उड़ा चुका है। इस संगठन के 3 गुर्गो ने एबॉर्शन करने वाले डॉ हेक्टर जेवलोस और उनकी पत्नी का अपहरण किया और 8 दिन तक बंधक बना कर रखा। इसी संगठन का अन्य एक आतंकी पर डॉ जॉर्ज टिलर की हत्या का प्रयास का मुकदमा चला।
▪आर्यन नेशन : 1970 को वजूद में आया पहला गोरे इसाईयो का राष्ट्रीय स्तर का आतंकी संगठन।
और फिर भी अगर आप आतंकवाद को किसी धर्म विशेष से जोड़ते है तो आप बेवकूफ ही हैं, कयोंकि इसलाम ने किसी जानवर पर भी जुल्मो जब्र को भी गलत ठहराया है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति Rafique Ahmad's Blog उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार Rafique Ahmad's Blog के नहीं हैं, तथा Rafique Ahmad's Blog उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।
दुसरी तरफ साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर से लेकर असिमानंद तक कई आतंकी जेलों में बंद हैं जोकी मुस्लिम नहीं हैं। एक बम धमाके में 20 लोगों की हत्या आतंकवाद है, बिलकुल सही लेकिन 1984 में दिल्ली, 2002 में गुजरात में हज़ारों लोगों की हत्या अथवा मुज़फ्फरनगर में 40 और ओडिशा में 2008 में 68 लोगों की हत्या को आतंकवाद की श्रेणी क्यो नहीं रख सकते है। जबकी हर दंगे की तैयारी योजनाबद्ध तरीके से होती है, जिसमें हथियारों के संग्रहण से सुनियोजित हमले तक होते हैं। तो फिर इनको आतंकवाद क्यों नहीं माना जाता है ? बेगुनाहों और मासुमों का कत्ल आतंकवाद है चाहे वो किसी बम धमाके द्वारा किये जाएँ या किसी योजनाबद्ध तरीके से दंगा-फसाद कर के। ये धारणा छोड़ दिजिये की आतंकवाद का कोई धर्म होता है।
और अगर आप अंतरराष्ट्रीय आतंक की बात करते हैं तो, एक रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक बमबारी मुस्लिम देशों में हुई है, जिससे लाखों की तादाद में मुस्लिम मारे गए, मुस्लिम राष्ट्रों पर बमबारी करने मे ज्यादा तर जो भी राष्ट्र आगे रहते है वे पुंजीपतियों , सरमायेदारों और साम्राज्यवादी होते है, जो की ईसाई पारसी यहुदी राष्ट्र के होते है। लेकिन बम बर्षा और दंगाईयों की हुडदंग और व्यापक जनसंहार के बावजुद इन पर ईल्जाम कतई नही लगता है, दुनियाँ के सभी मानवतावादी संगठन भी इनपर चुप्पी साधी रहती है। कुछ मुसलिम नामों को प्रस्तुत कर पुरे इसलाम को आतंकवाद से जोड़ना गलत है, जबकि कोई सच्चा मुसलमान किसी भी प्रकार से आतंकवाद का समर्थन कतई नहीं कर सकता।
और अगर आप किसी देश पर आतंकी हमले की बात करते हैं तो अमेरिका को ले लिजिये, ऍफ़.बी.आई के अनुसार वर्ष 1980 से 2005 तक 318 आतंकी हमले हो चुके थे। जिसमे 209 बम से हुए थे। 42 फीसद लटिनो ग्रुप ने, 24 फीसद कट्टरपंथी लेफ्ट वविंग,7 फीसद कट्टर पंथी यहूदी, 6 फीसद मुस्लिम कट्टरपंथी और 5 फीसद कम्युनिस्ट और बाकी अन्य ने किये
11 सितम्बर 2001 के बाद से एक भी अमेरिकी किसी भी मुस्लिम आतंकी द्वारा नहीं मरा। 9/11 से 2009 तक अमेरिका में 83 आतंकी हमले हुए जिसमे केवल 3 मुस्लिम आतंकियो ने किये। अमेरिका में 1970 के दशक में 2010 के दशक से ज़्यादा आतंकी गतिविधिया दर्ज की गयी जिसे करने वाले मुस्लिम नहीं थे। तब हर साल 60 आतंकी हमले हर साल होते जो 9/11 से 15 गुना ज्यादा है
और अमेरिका में प्रमुख आतंकी संगठन के नाम भी जान लिजिये ।
▪एनिमल लिबरेशन फ्रंट : जानवरों के हितों के लिए हिंसक गतिविधियाँ अपनाते है। 1982 में यूनाइटेड किंगडम की सभी चार बड़ी राजनैतिक पार्टियों समेत प्रधानमंत्री मार्ग्रेट थेचर के पास लेटर बम भेजे थे। 1983 में फर बेचने वाले स्टोर्स में सिलसिलेवार धमाके किये। सितम्बर 1985 में शरत गांगुली और स्टुअर्ट वॉकर जो ब्रिटिश इंडस्ट्रियल बायोलॉजिकल रीसर्च एसोसिएशन के शोधकर्ता थे , की गाड़ियों में बम लगा चुके है, सौभाग्य से दोनों बच गए थे
▪अल्फा66 और ओमेगा 7 : क्यूबा का संगठन है कई बम धमाके कर चुका है (
▪आर्मी ऑफ़ गोड : 1997 में एटलांटा के एंटी एबॉर्शन और एंटी समलैंगिक , दो एबॉर्शन क्लिनिक और लेस्बियन नाईट क्लब उड़ा चुका है। इस संगठन के 3 गुर्गो ने एबॉर्शन करने वाले डॉ हेक्टर जेवलोस और उनकी पत्नी का अपहरण किया और 8 दिन तक बंधक बना कर रखा। इसी संगठन का अन्य एक आतंकी पर डॉ जॉर्ज टिलर की हत्या का प्रयास का मुकदमा चला।
▪आर्यन नेशन : 1970 को वजूद में आया पहला गोरे इसाईयो का राष्ट्रीय स्तर का आतंकी संगठन।
और फिर भी अगर आप आतंकवाद को किसी धर्म विशेष से जोड़ते है तो आप बेवकूफ ही हैं, कयोंकि इसलाम ने किसी जानवर पर भी जुल्मो जब्र को भी गलत ठहराया है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति Rafique Ahmad's Blog उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार Rafique Ahmad's Blog के नहीं हैं, तथा Rafique Ahmad's Blog उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।
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